राजीव रंजन गिरि : जेएनयू, नई दिल्ली से हिन्दी साहित्य में एम.ए., एम.फिल.। एम.ए. में सर्वोच्च स्थान। दिल्ली विश्वविद्यालय से पी-एच. डी.। कुछ निबन्ध संस्कृत, उर्दू, उड़िया, अँग्रेज़ी और जर्मन में अनूदित। संवेद के पचास से अधिक अंकों का सह-सम्पादन। गांधी स्मृति एवं दर्शन समिति, राजघाट, नई दिल्ली के हिन्दी-अँग्रेज़ी जर्नल अनासक्ति दर्शन के ‘भूदान विशेषांक’ का सम्पादन। तीन वर्षों तक साहित्यिक मासिक पत्रिका पाखी में ‘अदबी हयात’ स्तम्भ लेखन। गांधी-दर्शन की मासिक पत्रिका अन्तिम जन का तीन वर्षों तक सम्पादन। एन.बी.टी. की पत्रिका पुस्तक संस्कृति के सलाहकार रहे। आलोचनात्मक लेखन के लिए विद्यापति सम्मान। प्रकाशित कृतियाँ : परस्पर : भाषा – साहित्य – आंदोलन; अथ-साहित्य : पाठ और प्रसंग; संविधान सभा और भाषा विमर्श; लघु पत्रिका आन्दोलन; सामन्ती ज़माने में भक्ति आन्दोलन; 1857 : विरासत से जिरह; प्रेमचन्द : सम्पूर्ण बाल साहित्य; गांधीवाद रहे न रहे सहित दस सम्पादित पुस्तकें। सम्प्रति : राजधानी कॉलेज (दिल्ली विश्वविद्यालय) नई दिल्ली में अध्यापन। सम्पर्क : rajiv.giri19@ gmail.com; twitter : @rajivgiri2015