Yajurveda (Bhavarth of selected Richas in English & Hindi)
यजुर्वेद (हिन्दी व अंग्रेजी में सरलीकृत चयनित ऋचायें)

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यजुर्वेद (हिन्दी व अंग्रेजी में सरलीकृत चयनित ऋचायें)

Yajurveda (Bhavarth of selected Richas in English & Hindi)
यजुर्वेद (हिन्दी व अंग्रेजी में सरलीकृत चयनित ऋचायें)

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Translator(s) — Abhishek Shrivastava
अनुवादक  — ज्ञानेन्द्र अवाना

| ANUUGYA BOOKS | HINDI | 2022 |

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Description

पुस्तक के बारे में

पृथिवि देवयजन्योषध्यास्ते मूलं मा हिंसिषं व्रजं गच्छ गोष्ठानं
वर्षतु ते द्यौर्बधान देव सवित: परमस्यां पृथिव्या: शतेन
पाशैर्योऽस्मान्द्वेष्टि यं च वयं द्विष्मस्तमतो मा मौक्॥

(यजुर्वेद १-२५)

पृथ्वी पवित्र है। यह हमारा परम कर्तव्य है, कि इसकी शुद्धता और पवित्रता हमेशा बनी रहे। हमें पृथ्वी की वनस्पति क्षमता को कभी हानि नहीं पहुंचाना चाहिए। जो दुष्ट प्रवृत्ति के लोग हानि पहुंचाते हैं, उन्हें ईश्वर तुम दुष्ट कर्मों से निवृत्त कर दो। हमें पृथ्वी की शुद्धता बनाए रखने के लिए यज्ञ करना चाहिए और सब मनुष्यों को चाहिए की परस्पर ईर्ष्या द्वेष भुलाकर एक दूसरे के सुख की वृद्धि के लिए प्रयास करें।

The Earth is sacred. I will never damage the fertility of vegetation of Earth. May God evil mind people who hurt the fertility of vegetation be eliminated. We will do Yajna for purifying the Earth. May God, the Yajna bring Rain and Light. We should forget our differences. Let’s make together the Earth, seat of Yajna, a pleasant place to live. (Yajurveda 1-25)

…इसी पुस्तक से…

नमो व: पितरो रसाय नमो व: पितर: शोषाय नमो व: पितरो
जीवाय नमो व: पितर: स्वधायै नमो व: पितरो घोराय नमो व:
पितरो मन्यवे नमो व: पितर: पितरो नमो वो गृहान्न: पितरो
दत्त सतो व: पितरो देष्मैतद्व: पितरो वास:॥

(यजुर्वेद २-३२)

हम नमन करते हैं, उन विद्वानों को जो हमें श्रेष्ठ ज्ञान देते हैं। हम नमन करते हैं, उन श्रेष्ठ पुरुषों को जो आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक न्याय द्वारा हमें धर्मयुक्त जीविका प्रदान करते हैं। हम सत्कार करते हैं, उन साहसी बहादुर लोगों का जो दुष्टों के विरुद्ध लड़ते हैं। हम ऐसे सभी विद्वान मनुष्यों का आह्वान करते हैं कि वो हमारे अतिथि होना स्वीकार करें और हमें आशीर्वाद प्रदान करें।

We are thankful to the seniors who give us knowledge. We welcome to the guardian of society for giving us means of good life by way of economic, social and political justice. We salute those braves and righteous who fight against the wicked. We invoke them to come to our homes and institutions and accept our hospitality and bless us with thier gifts. (Yajurveda 2-32)

…इसी पुस्तक से…

Additional information

Weight 400 g
Dimensions 9 × 6 × 0.5 in
Binding Type

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