Varjit Sambandh Nobel Sahitya mein<br>वर्जित सम्बन्ध : नोबेल साहित्य में
Varjit Sambandh Nobel Sahitya mein
वर्जित सम्बन्ध : नोबेल साहित्य में
₹240.00 - ₹420.00

Varjit Sambandh Nobel Sahitya mein
वर्जित सम्बन्ध : नोबेल साहित्य में

240.00420.00

Author(s) — Vijay Sharma
लेखिका — विजय शर्मा

| ANUUGYA BOOKS | HINDI| 232 Pages | 2021 |

Description

…लेखक के बारे में…

डॉ. विजय शर्मा, पीएच. डी l समालोचक, सिनेमा विशेषज्ञ, विश्व साहित्य अध्येता l पूर्व एसोशिएट प्रोफ़ेसर l विजिटिंग प्रोफ़ेसर हैदराबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी तथा रॉची एकेडमिक स्टाफ़ कॉलेज l देश के विविध स्थानों पर अनेक सेमीनार एवं कार्यशाला आयोजित l सेमीनार में शोध-पत्र प्रस्तुति l कई हिन्दी और इंग्लिश पत्रिकाओं में सह-संपादन l अतिथि संपादन ‘कथादेश’ दो अंक l ‘हिंदी साहित्य ज्ञानकोश’ में सहयोग l प्रमुख पत्र-पत्रिकाओं में कहानी, आलेख, पुस्तक-समीक्षा, फ़िल्म-समीक्षा, अनुवाद प्रकाशित l आकाशवाणी से पुस्तक-फ़िल्म समीक्षा, कहानियाँ, रूपक तथा वार्ता प्रसारित l प्रकाशित पुस्तकें : अपनी धरती, अपना आकाश : नोबेल के मंच से (द्वितीय संस्करण); वॉल्ट डिज़्नी : ऐनीमेशन का बादशाह; अफ़्रो-अमेरिकन साहित्य : स्त्री स्वर; स्त्री, साहित्य और नोबेल पुरस्कार (द्वितीय संस्करण); विश्व सिनेमा : कुछ अनमोल रत्न; सात समुंदर पार से… (प्रवासी साहित्य विश्लेषण); देवदार के तुंग शिखर से; हिंसा, तमस एवं अन्य साहित्यिक आलेख; क्षितिज के उस पार से; स्त्री, साहित्य और विश्व सिनेमा; बलात्कार, समलैंगिकता एवं अन्य साहित्यिक आलेख; सिनेमा और साहित्य : नाज़ी यातना शिविरों की त्रासद गाथा; तीसमार खाँ (कहानी संग्रह); विश्व सिनेमा में स्त्री (संपादन); नोबेल पुरस्कार: एशियाई संदर्भ; ऋतुपर्ण घोष : पोर्ट्रेट ऑफ़ ए डॉयरेक्टर (ई-बुक); ऑर्सन वेल्स : निर्देशन की जिद, काँटों का ताज (ई-बुक); मृत्यु : विश्व साहित्य की एक यात्रा; महान बैले नृत्यांगनाएँ; कथा मंजूषा; विश्व की श्रेष्ठ 25 कहानियाँ (अनुवाद); लौह शिकारी (अनुवाद) l दो पाण्डुलिपि प्रकाशनाधीन l सम्पर्क : प्रार्थना, 326 न्यू लेआउट, सीतारामडेरा, एग्रिको, जमशेदपुर-831009 l फोन : 8789001919 l ई-मेल : vijshain@ gmail.com

…पुस्तक के बारे में…

बलात्कार एक गंभीर अपराध है। मगर अक्सर अपराधी छूट निकलता है और शिकार की न केवल शारीरिक हानि होती है वरन उसकी मानसिक-सामाजिक हानि भी होती है। उसकी अस्मिता की हानि होती है। वह दूसरों की नजर में गिर जाता है उससे भी बड़ी हानि है यह व्यक्ति खुद अपनी निगाह में भी गिर जाता है। बलात्कार एक बहुत जटिल क्रिया है। यदि इसका मनोवैज्ञानिक विश्लेषण किया जाए तो हम देखते हैं पिता गुस्से में पिकोला का बलात्कार नहीं करता है। न ही उसे कष्ट पहुँचाने के लिए ऐसा करता है, वह पर-पीड़क व्यक्ति नहीं है। न ही यह शक्ति प्रदर्शन के लिए किया गया बलात्कार है जैसा कि बलात्कार की अधिकाँश घटनाओं में होता है। हाँ, उसे औरतों से घृणा है, मगर वह बेटी का बलात्कार करते समय उसके प्रति घृणा से संचालित नहीं है। वैसे मनोवैज्ञानिक रूप से उसका सारा जीवन घृणा से संचालित है। वह पिकोला का अपमान करने के लिए उसका बलात्कार नहीं करता है। एक शोध बताता है 40% बलात्कारी नशे या शराब के लती होते हैं। वे अपनी किशोरावस्था से इस लत के शिकार होते हैं। और शक नहीं, पिकोला का पिता भयंकर शराबी है। मनोविज्ञान कहता है बाल शोषण करने वाला आदमी यौन दृष्टि से हैरान-परेशान होता है, निराश आदमी होता है। सनकी और पागल होता है। चोले पागल नहीं है। टोनी मॉरीसन इस घटना का एक कारण नशा बताती हैं, एक गलती, बिना किसी पूर्व योजना के किया गया बलात्कार। मगर इससे इस जघन्य अपराध की तीव्रता कम नहीं हो जाती है।

…इसी पुस्तक से…

बच्चे पैदा करने में क्या मजा है? क्या कुत्ते, मकड़े, बिल्ली यही नहीं करते हैं? मेरे दोस्त हमें मौलिक होना चाहिए। कहने वाला स्क्रिप्टराइटर पेड्रो दिन में बीस घंटे काम करता है। इस काम करने में सीरियल की स्क्रिप्ट लिखना, उनका रिहर्सल करना और उनका रेडियो के लिए नाट्य रूप प्रस्तुत करना, इन नाटकों का निर्देशन और इनमें अभिनय करना सब शामिल है। हर एपीसोड में पेड्रो खुद मुख्य पात्र होता है। उसके सारे एपीसोड वर्जित संबंध को चित्रित करते हैं। पहला एपीसोड एक भाई-बहन के निषिद्ध प्रेम के विषय में है। लड़की जल्दबाजी में अपने तमाम प्रशंसकों को छोड़ कर एक साधारण लड़के से शादी को तैयार हो जाती है। शादी वाले दिन भाई बेहोश हो जाता है और डॉक्टर अंकल को लड़की के गर्भवती होने का पता चलता है। डॉक्टर जब दूल्हे को यह बताता है तो बेचारे का मुँह खुला रह जाता है। एक अन्य एपीसोड में एक व्यक्ति दुनिया से चूहे समाप्त करने के अभियान में जुटा हुआ है क्योंकि बचपन में उसकी शिशु बहन को चूहों ने भकोस लिया था। इन सब एपीसोड में एक बात साझा है वह है इनका कुत्सित, अनैतिक, भ्रष्ट, गलत आचरण, आडम्बरपूर्ण होना। ये सीरियल मनुष्य के श्याम पक्ष को चित्रित करते हैं। मजे की बात है अंत तक बहुत सारे श्रोता इन्हें पसंद करते हैं। मनुष्य कुत्सा में बहुत रूचि लेता है। कीचड़ से लथपथ, बड़बोलेपन से अलंकृत ये कहानियाँ श्रोताओं को बाँधने में सफ़ल है और रेडियो की विज्ञापनों से होने वाली आ-मद-नी में जबरदस्त इजाफ़ा करती हैं।

…इसी पुस्तक से…

अनुक्रम

  • अपनी बात – वर्जित सम्बन्ध : नोबेल साहित्य में
  • प्रेम विहीन प्रेम में मरते लोग
  • द ब्लूएस्ट आई : पीड़ा की इन्तहा
  • नाज़ी विकृति की मुनादी : टिन ड्रम
  • अस्वस्थ व्यक्ति का विकृत सम्बन्ध
  • क्रेजी प्यार, क्रेजी लोग

Additional information

Dimensions N/A
Binding Type

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