BaalKand-2 : Tana-Bana
बालकाण्ड-2 : ताना-बाना

30.00

10 in stock

Author(s) – Ashok Bhatia
लेखक — अशोक भाटिया

| ANUUGYA BOOKS | HINDI | 32 Pages | PIN BACK | 2022 |
| 5.5 x 8.5 Inches | 100 grams | ISBN : 978-93-91034-97-9|

 

10 in stock

Description

स्कूल

ढाई-तीन बरस की छुटकी पार्क में खेल रही थी। वह मां के आगे-आगे गेंद को ठोकरें मारती हंसती हुई आगे बढ़ती जा रही थी।
सामने एक बच्चे ने छुटकी और गेंद को देखा। वह गिरता-पड़ता छुटकी की तरफ बढ़ने लगा। उसे अपनी तरफ़ आते देख छुटकी ने फ़ौरन बॉल उठा ली और उसे बाएं कंधे से लगाकर टेढ़ी नज़र से बच्चे को देखा। बच्चा आगे बढ़ा और अपना हाथ आगे बढ़ा दिया।
– दे दो बेटे।’ मां ने कहा। छुटकी ने गेंद दे तो दी, पर आकर मां से लिपट गई और रुआंसी-सी हो गई। मां ने उसके सर पर हाथ रखकर समझाया– अभी दे देगा वापिस।’
पल-भर बाद ही छुटकी बच्चे के पास गई और उससे गेंद लेकर मां के पास आ गई। बच्चा छुटकी और गेंद को देखता रह गया।
छुटकी फिर उसके पास गई। इस बार दोनों तरफ से हाथ बढ़े। बच्चे को गेंद मिली, तो वह उमंग में तेज़ चलने लगा। गिरा भी, पर गेंद को पकड़े रहा।
छुटकी ने एक बार फिर गेंद ले ली और पीछे हट गई। गेंद देने और लेने की यह क्रिया एक-दो बार और हुई। आसपास के लोग भी यह रोचक दृश्य देख रहे थे। आखिर छुटकी ने बच्चे के पास जाकर उसके हाथ में गेंद थमा दी, फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा।
अब उसकी चाल में अजीब मस्ती आ गई थी।

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