Samay kee Kahani : Kahani ka Samay <br> समय की कहानी : कहानी का समय
Samay kee Kahani : Kahani ka Samay
समय की कहानी : कहानी का समय
₹280.00 - ₹280.00

Samay kee Kahani : Kahani ka Samay
समय की कहानी : कहानी का समय

Samay kee Kahani : Kahani ka Samay
समय की कहानी : कहानी का समय

280.00

Author(s) —  Tarsem Gujral
लेखक — तरसेम गुजराल

| ANUUGYA BOOKS | HINDI| 128 Pages | HARD BOUND | 2021 |
| 6 x 9 Inches |

Description

लेखक के बारे में

डॉ. तरसेम गुजराल

जन्म – 10-04-1950
शिक्षा – एम.ए. हिन्दी, पीएच.डी.
कविता, कहानी, उपन्यास, आलोचना, अनुवाद, संपादन की 58 पुस्तकें प्रकाशित।
आलोचना की 5 पुस्तकें प्रकाशित
1. हिन्दी उपन्यास जमीन की तलाश (2016)
2. मोहन सबरा का काव्य पथ (2018)
3. रचना रचनाशीलता और सभ्यता विमर्श (निबन्ध)
4. रस कालजयी उपन्यास (2018)
5. हिन्दी उपन्यास स्त्री की तरफ खुलती खिड़की और अब (2019)
समय की कहानी कहानी का समय
सम्मान – 1. जलता हुआ गुलाब उपन्यास पर 1889 में प्रेमचंद महेश सम्मान; 2. राख और टीलें कविता-संग्रह पर 93-94 में केन्द्रीय हिन्दी निदेशालय द्वारा सम्मान; 3. उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान का सौहार्द्र सम्मान 2014; 4. पंजाब का शिरोमणि सम्मान 2013

पुस्तक के बारे में

हिन्दी के कथाकार, कथा समीक्षक और कथा के सजग पाठक अपने को इस बात के लिए जरूर खुशकिस्मत मानते होंगे कि काफी पहले ही प्रेमचन्द ने साहित्य की परिभाषा को लेकर कह दिया था– साहित्य की बहुत सी परिभाषायें की गई हैं पर मेरे विचार से उसकी सर्वोच्च परिभाषा जीवन की आलोचना है, चाहे वह निबन्ध के रूप में हो, चाहे कहानियों के, या काव्य के, उसे हमारे जीवन की आलोचना और व्याख्या करनी चाहिए। तब से उन मित्रों की भी कमी नहीं, जो कहानी से मनोरंजन के अतिरिक्त जीवन की विविधता, गहराई, संघर्ष, सांस्कृतिक चेतना और पर्तों में छिपी सच्चाई की उम्मीद करते हैं। कला और क्राफ्ट कहानी को समर्थ ढंग से कहने प्रभाव की नज़र से अधिक ग्राह्य बनाने में मदद करते हैं परन्तु मूलत: कहानी अपने पूरेपन से जानी जाती है। रोनी मारिसन ने कहा था कि एक कहानी गढ़ो, हमारी खातिर और अपने लिए भी और समाज में अपना नाम भूल जाओ। हमें बताओ कि यह दुनिया तुम्हारे साथ अँधेरे और उजालों में कैसा व्यवहार करती है। कौन सी बात विश्वसनीय है और किस बात से डर लगता है। कहानी आलोचना में यदि यही बात जरूरी मान ली जाये तो पुनरावलोकन, अनेकार्थ्कता, यथार्थ की जटिलता और समय स्पष्ट हो सकते हैं।
इस बीच आलोचना विवेक का बुरी तरह क्षरण हुआ है। सामाजिक सरोकारों की खोज संकट में मदद करने वाली है, जिसे फिर से अर्जित करने की जरूरत है। क्या भूमंडलीकरण और स्वतंत्र चेतना साथ-साथ आ सकते हैं या नहीं? समय की चुनौतियों से जूझते नये कथाकार की शानादल का सवाल भी सामने रहा, जब बड़े नामवर आलोचक के पास उन्हें पढ़ने का समय तक नहीं बचा।

विषय सूची

समयगत चुनौतियों की कहानियाँ

समयगत चुनौतियों की कहानियाँ

हिन्दी की चर्चित राजनीतिक कहानियाँ

बदला दौर बदली कहानियाँ

कहानी की जमीन

बहुत कठिन है डगर पनघट की

तीन दुनियाएँ तथा उनकी कहानियाँ

तीन दुनियाओं की कहानियाँ–II

Additional information

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Binding Type

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