Har Har Shoolin <br> हर हर शूलीन
Har Har Shoolin
हर हर शूलीन
₹190.00 - ₹290.00

Har Har Shoolin
हर हर शूलीन

190.00290.00

Author(s) —  Kumar Vikramaditya
लेखक — कुमार विक्रमादित्य

| ANUUGYA BOOKS | HINDI| 143 Pages | 6 x 9 Inches |

|also available in PAPER BACK & HARD BOUND | 6 x 9 Inches |

Description

लेखक के बारे में

कुमार विक्रमादित्य

कुमार विक्रमादित्य : आपके अन्दर छुपा बच्चा वक़्त का इंतज़ार करता रहता है अनुकूल परिस्थिति मिलते ही वह आगे बढ़ने की चेष्टा करता है। लेखक के अन्दर का बच्चा भी बाहर आने के लिए छटपटा रहा था। साहित्यिक संगोष्ठी विशेषकर अखिल भारतीय साहित्य परिषद् में जाते जाते लेखक “कुमार विक्रमादित्य” के अन्दर का बच्चा कब बाहर आ गया, पता भी नहीं चला।
बिहार राज्य के सहरसा जिले के गढ़िया-बलहा गाँव में ०3 दिसम्बर 1979 को जन्म। शिक्षा – एम.एससी. (द्वय) जंतु विज्ञान और भूगोल, बी एड (बी.एच.यू. ), एम.एड. (जामिया), नेट। प्राथमिक शिक्षा गाँव के विद्यालय में ही हुई। गाँव में उच्च विद्यालय नहीं होने के कारण जिला स्कूल सहरसा से मैट्रिक उत्तीर्ण होने के बाद टी.एन.बी. महाविद्यालय भागलपुर से पढ़ाई। उच्च शिक्षा हेतु बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय और जामिया मिल्लिया इस्लामिया गए।
शिक्षा में लगाव के चलते सरकारी उच्च विद्यालय में अध्यापन का कार्य पिछले पंद्रह वर्षों से करते आ रहे हैं, वर्तमान में श्री दुर्गा उच्च विद्यालय सिहौल, सहरसा में कार्यरत। अध्यापक शिक्षा महाविद्यालय, सहरसा में भी पढ़ाने का वर्षों का अनुभव।
राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में दर्जनों कहानियाँ और कवितायें प्रकाशित। लेखक हिंदी, अँग्रेजी और मैथिली में लेखन करते हैं। लेखक के मैथिली में पाँच लघु कथा (अनुवाद) प्रकाशित। हिंदी में काव्य ग्रन्थ (मेघलेखा), दो आँखें (कहानी संग्रह), ऑनलाइन शिक्षा प्रणाली, प्रकाशित। अँग्रेजी में उपन्यास “Rhythm and Rhythm” प्रकाशित ।
सम्पर्क : कृष्णा नगर, वार्ड संख्या 22, बटराहा मुस्तफा नगर रोड, सहरसा, बिहार 852201, फोन – 7631713526, 9031409453 मेल – kmrvikramaditya82@ gmail.com, kvikramwriter@gmail.com

पुस्तक के बारे में

चंचल चक्षु प्रायः ह्रदय की तरंगित केंद्र को नहीं देख पाता। वह देखता है बाहरी उन्माद को, भ्रमवश उसे अपना मान भी लेता। वक़्त के साथ साथ नेत्र के सामने लगा पर्दा हटने लगता है और उसे आभास होता है कि मैंने तो अपने अन्दर से उठ रही तरंग को पहचानने में बहुत देर कर दी। आभास को यथार्थ में जो बदल लेता है, उसे वास्तविकता के उस रूप का दर्शन होता है जो जीवन के हर मोड़ पर आगे बढ़ने में मददगार साबित होता है। उसे लगता है कि अरे ये तो हम सभी के अन्दर सुषुप्त अवस्था में ऐसे पड़ा रहता है जैसे कोई बीज अपने प्राण को बिना पानी के भी बचाए रहता है लेकिन उचित पोषण मिलने पर वही बीज विशाल वृक्ष बन जाता है।
इस उपन्यास की कहानी है आपकी, मेरी और हम सभी की जो हमें अपने अन्दर बैठे शूलीन से साक्षात्कार कराता है। “हर हर” के उस रूप का दर्शन मुश्किल है पर असंभव भी नहीं। गरीबी या अमीरी “हर हर” के लिए कोई मायने नहीं रखता वह तो मंगरू के लगन और आत्मविश्वास से अभिभूत हो उसे दर्शन देता है जिससे वह अपने लक्ष्य को हासिल कर सके । पंकजा और यश का अकस्मात् मिलना और केवल अपने लिए नहीं बल्कि महाविद्यालय के लिए ऐसा कुछ कर जाना, विरले मिलते हैं।
एक परीक्षा को कौन कहे विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए सभी को तैयार करना और वो भी प्रजातांत्रिक व्यवस्था के तहत जो वर्तमान चुनाव प्रक्रिया में अपनाया जाय तो किसी भी राष्ट्र की आधी समस्या यूँ ही समाप्त हो जायेगी। चंडाल चौकड़ी के द्वारा किया गया धमाल प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए मार्गदर्शन का काम करेगा।

— कुमार विक्रमादित्य

 

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