GANDHI : BhavisHya ka Mahanayak - Ebook
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GANDHI : BhavisHya ka Mahanayak – Ebook

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AUTHOR – Dr. Saroj Kumar Verma

अनुक्रम

  • भूमिका 9
    स्वतन्त्र खण्ड
  • ‘हिन्द स्वराज्य’ : गाँधी का सभ्यता-दर्शन
  • भूमंडलीकरण के युग में गाँधी का सर्वोदय : औचित्य की तलाश
  • गाँधी-चिन्तन में पर्यावरण-चिन्ता
  • गाँधी का सत्याग्रह : मानवाधिकारों के मात्रात्मक संरक्षण की प्रविधि
    तुलनात्मक खंड
  • महावीर और गाँधी की अहिंसा : एक तुलनात्मक अध्ययन
  • विवेकानन्द और गाँधी का सभ्यता-चिंतन : एक तुलनात्मक अध्ययन
  • टैगोर और गाँधी का ईश्वर-विचार : एक तुलनात्मक अध्ययन
  • श्री अरविन्द और गाँधी का शिक्षा-दर्शन : एक तुलनात्मक अध्ययन

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Description

यद्यपि गाँधी को तकनीकी अर्थ में दार्शनिक नहीं माना जाता, क्योंकि उन्होंने स्पष्ट रूप से दर्शन की तत्त्वमीमांसीय अथवा ज्ञानमीमांसीय शब्दावली में अपने विचार व्यक्त नहीं किए हैं, परन्तु उनमें सैकड़ों वर्ष पूर्व भविष्य को देख लेने की जो दूरदृष्टि थी, वह उन्हें व्यावहारिक दार्शनिक के रूप में मजबूती से स्थापित कर देती है। यह स्थापना देश और दुनिया के लिए जितनी उपयोगी है, उतनी तकनीकी दार्शनिकों की सैद्धान्तिक स्थापनाएँ नहीं, क्योंकि ये सैद्धान्तिक स्थापनाएँ इतनी सूक्ष्म होती हैं कि उन्हें स्थूल व्यवहार तक उतरने में कई परतों से गुजरना पड़ता है और इस क्रम में वे अक्सर धुँधली हो जाती हैं। मगर गाँधी धुँधले नहीं होते। इसीलिए समाज उन्हें सहजता से समझ लेता है और वे लोकप्रिय तथा प्रेरक सिद्ध होते हैं।
…इसी पुस्तक सेयद्यपि गाँधी को तकनीकी अर्थ में दार्शनिक नहीं माना जाता, क्योंकि उन्होंने स्पष्ट रूप से दर्शन की तत्त्वमीमांसीय अथवा ज्ञानमीमांसीय शब्दावली में अपने विचार व्यक्त नहीं किए हैं, परन्तु उनमें सैकड़ों वर्ष पूर्व भविष्य को देख लेने की जो दूरदृष्टि थी, वह उन्हें व्यावहारिक दार्शनिक के रूप में मजबूती से स्थापित कर देती है। यह स्थापना देश और दुनिया के लिए जितनी उपयोगी है, उतनी तकनीकी दार्शनिकों की सैद्धान्तिक स्थापनाएँ नहीं, क्योंकि ये सैद्धान्तिक स्थापनाएँ इतनी सूक्ष्म होती हैं कि उन्हें स्थूल व्यवहार तक उतरने में कई परतों से गुजरना पड़ता है और इस क्रम में वे अक्सर धुँधली हो जाती हैं। मगर गाँधी धुँधले नहीं होते। इसीलिए समाज उन्हें सहजता से समझ लेता है और वे लोकप्रिय तथा प्रेरक सिद्ध होते हैं।
…इसी पुस्तक से

Additional information

LANGUAGE

HINDI

BINDING

HARD BOUND

PAGES

152

PUBLISHER

ANUUGYA BOOKS

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