Angor (Poetry in Hindi-English) अंगोर (अंग्रेजी-हिन्दी में कविता संग्रह)
Angor (Poetry in Hindi-English) अंगोर (अंग्रेजी-हिन्दी में कविता संग्रह)
₹160.00

Angor (Poetry in Hindi-English) अंगोर (अंग्रेजी-हिन्दी में कविता संग्रह)

160.00

12 in stock

Author(s)Jacinta Kerketta
लेखक — जसिंता केरकेट्टा

Translated to English by Bhumika Chawla-d’Souza, Vijay K. Chhabra & Fr. Cyprian Ekka

| ANUUGYA BOOKS | HINDI-ENGLISH (DIGLOT) | 160 Pages | PAPER BACK | 2021 |
| 5.5 x 8.5 Inches | 400 grams | ISBN : 978-93-89341-62-1 |

पुस्तक के बारे में

साहित्य में आरक्षण नहीं होता
पिछले दिनों एक सम्मान समारोह में भाग लेने के लिए दिल्ली गया था। समारोह की अध्यक्षता एक प्रतिष्ठित हिन्दी दैनिक के सम्पादक कर रहे थे। उन्होंने अपने अध्यक्षीय भाषण में कहा कि “साहित्य में आरक्षण नहीं होता”। सम्भवतः उन्होंने ऐसा इसलिए कहा कि सम्मान पानेवालों में से कुछ लोग आरक्षित वर्ग से थे। हम उनसे सहमत हैं कि साहित्य में आरक्षण नहीं होता। लेकिन, साहित्य में मनुष्यता की बेहतरी के लिए अन्वेषण जारी रहता है। एक रचनाकार एक नया सच, एक नया परिवेश, एक अनदेखी दुनिया के बारे कहने के लिए निरन्तर प्रयासरत रहता है। सफलता, असफलता और लगातार अभ्यास के बाद वह छपता है और अनेक कठिनाइयों, समस्याओं को झेलने के बाद उसका संग्रह प्रकाशित हो पाता है। ऐसे में एक नवोदित कवि का पहला संग्रह प्रकाशित होना निश्चय ही उसके शुभचिन्तकों, पाठकों एवं साहित्य प्रेमियों के लिए भी एक सुखद घटना है। जसिन्ता केरकेट्टा बहुत कम समय में, अपनी सृजनात्मकता एवं सक्रियता से हिन्दी साहित्य जगत में, पहचान बनाने में सफल रहीं हैं। उन्होंने अपनी कविताओं में परिवेश-विशेष को जिस सजगता और प्रखरता से परिचय कराया है, वह कविता प्रेमियों के लिए एक नया अनुभव है। उनकी कविताओं में आदिवासी समाज का दुख, दर्द, ग़ुस्सा, आक्रोश उभर कर आया है। इसके अलावा जसिन्ता ने अपनी कविताओं में आदिवासी स्त्री की स्थिति को भी आत्मीयता से समझने का प्रयास किया है।

There is no Reservation in Literature!
I recently went to Delhi to participate in an award ceremony. The function was presided over by the editor of a prestigeous Hindi Daily. In his presidential address he said, “There is no reservation in literature!” He might have said so, because some of the decorated persons hailed from the reserved category. I agree, there is no reservation in literature. Yet, literary research continues unabated for the betterment of humanity. The creative writer always strives to comment on a new truth, a new millieu and an unseen world. After success, failure and consistent practice, that work gets printed and facing considerable difficulties that collection gets published.
All things considered, the publication of the first volume of a rising poet is indeed a delight to her well-wishers, readers and literature lovers. Jacinta Kerketta has in a short time succeeded in becoming acclaimed in the Hindi literary world due to her consistent creativity. The alertness and efficiency with which she has introduced a particular context in her verses, is a new experience to poetry lovers. Her poems effectively convey the pain, anguish and anger of the indigenous tribal society. Additionally, Jacinta has sought to empathetically understand the tribal woman’s plight through her poems.

12 in stock

Description

जसिन्ता केरकेट्टा / Jacinta Kerketta

जन्म 1983 – झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम ज़िले में सारंडा जंगल से सटे झारखंड व ओड़िसा की सीमा पर स्थित मनोहरपुर प्रखंड के खुदपोस गाँव में।
Born on 3 August 1983 at Khudpos village of Manoharpur Block adjacent to the sprawling Saranda Jungle in the West Singhbhum District, Jharkhand, bordering Odisha.

काव्य-संग्रह — 2016 में पहला काव्य-संग्रह “अंगोर” का हिन्दी-जर्मन संस्करण “Glut”, जर्मनी से प्रकाशित। 2018 में पहला काव्य-संग्रह “अंगोर” का हिन्दी-इतालवी “Brace” इटली से प्रकाशित। 2020 में पहला काव्य-संग्रह ‘अंगोर’ हिंदी-फ्रैंच में ‘ANGOR’ नाम से फ्रांस से प्रकाशित।
2018 में दूसरा काव्य-संग्रह ‘जड़ों की ज़मीन’ हिंदी-अंग्रेजी में भारतीय ज्ञान पीठ नयी दिल्ली से प्रकाशित। हिंदी-जर्मन में ‘Tiefe Wurzeln’ नाम से द्रौपदी वेरलाग, जर्मनी से प्रकाशित ।
Collection of poems — In 2016 her first collection of poems “ANGOR” was published in Hindi-English by adivaani, Kolkata. The Hindi-German version of “ANGOR” was published under the title “GLUT” by Draupadi Verlag in Germany. In 2018 the first book ANGOR was published in Hindi/Italian under the title “Brace” from Italy. In 2020 the first book ANGOR was published in Hindi-French under the title ‘ANGOR’ from France. In 2018 the second collection of poems “Jadon ki zamin” (Land of the roots) was published in Hindi-English by Bharatiya Jnanpith, New Delhi. The Hindi-German version “Tiefe Wurzeln” was published by Draupadi Verlag in Germany.

रचनाएँ — बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग से प्रकाशित पत्रिका “परिचय” सहित देश की प्रतिष्ठित साहित्यिक पत्रिकाओं में अनेक कविताएँ प्रकाशित जिनमें दिल्ली से प्रकाशित पत्रिका “नया ज्ञानोदय”, “युद्धरत आम आदमी”, “शुक्रवार” शामिल हैं। विभिन्न कवियों के कविता-संग्रहों में भी इनकी कविताएँ शामिल, इनमें “शतदल”, “रेतपथ, समंदर में सूरज”, “क़लम को तीर बनने दो”, “माटी” आदि स्मरणीय हैं।
Literary works —  Numerous poems published in the country’s reputed literary magazines, including in “Parichay” of the Hindi Department of the Benaras Hindu University. Additionally, they are also carried by the Delhi publications — “Naya Gyanoday”, “Yuddhrat am admi” and “Shukrawar”. Her works have also been carried in anthologies such as “Shat Dal”, “Retpath”, “Samandar men suraj”, “Kalam ko tir hone do”, “Mati” and so on.

उपलब्धियाँ — 2014 में आदिवासियों के स्थानीय संघर्ष पर उनकी एक रिपोर्ट पर बतौर आदिवासी महिला पत्रकार उन्हें इंडिजिनस वॉयस ऑफ एशिया का रिक्गनिशन अवॉर्ड, एशिया इंडिजिनस पीपुल्स पैक्ट, थाईलैंड की ओर से दिया गया। 2014 में विश्व आदिवासी दिवस के मौक़े पर झारखंड इंडिजिनस पीपुल्स फोरम की ओर से कविताओं के लिए सम्मानित की गई। 2014 में ही उन्हें बतौर स्वतन्त्र पत्रकार प्रतिष्ठित यूएनडीपी फेलोशिप प्राप्त हुआ। 2014 में वे छोटानागपुर सांस्कृतिक संघ की ओर युवा कवि के रूप में “प्रेरणा सम्मान” से सम्मानित की गई। 2015 में उन्हें रविशंकर उपाध्याय स्मृति युवा कविता-पुरस्कार प्राप्त हुआ। बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय में डॉ. रविशंकर उपाध्याय स्मृति संस्थान की ओर से यह पुरस्कार युवा कवि के रूप में उनकी संभावनाओं को देखते हुए उन्हें दिया गया था। 2017 में प्रभात ख़बर अख़बार द्वारा अपराजिता सम्मान से सम्मानित।
Achievements — 2014: “Indigenous Voice of Asia Award” by the Asia Indigenous People’s Pact, Thailand, for her report as Adivasi journalist on Adivasi local resistance movements. 2014: Award by the Jharkhand Indigenous People’s Forum for her poetry, on the occasion of World Indigenous day. 2014: National level UNDP Fellowship in her capacity as a free-lance journalist. 2014: “Prerana Samman” from Chotanagpur Cultural Association as an inspiring young poet. 2015: Ravishankar Upadhyay Memorial Youth Poetry Award as a young promising poet, awarded by Dr. Ravishankar Upadhyay Memorial Institute, Benares. 2017: Aparajita Award by newspaper Prabhat Khabar.

यात्राएँ2016 में जर्मनी की यात्रा। जर्मनी के कई युनिवर्सिटी और शहरों में एकल कविता पाठ और आदिवासी मुद्दों पर चर्चा। 2017 में जर्मनी के हैमबर्ग युनिवर्सिटी में आयोजित आदिवासी विस्डम विषयक सेमिनार में हिस्सा लिया और कविताओं का पाठ किया। 2018 में जर्मनी, स्विट्जरलैंड, अास्ट्रिया और इटली के कई युनिवर्सिटी में कविताओं का पाठ और भारत में आदिवासियों की स्थति पर अपनी बात रखी। 2020 में अमेरिका में हार्वर्ड यूनिवर्सिटी द्वारा आयोजित ‘हार्वर्ड इंडिया कन्फ्रेंस’ में स्वतंत्र पत्रकारिता और पर्यावरण पर अपनी बात रखी। मिनिसोटा में विद्यार्थियों से संवाद और कविता पाठ। 2020 में फ्रांस का दौरा। पेरिस में कविता पाठ और संवाद।
Foreign travel2016: Germany: poetry readings and discussions about Adivasi issues in a number of German cities and universities.
2017: Hamburg University, Germany: presentation and poetry reading in a seminar on Adivasi wisdom. 2018: Germany, Switzerland, Italy and Austria: poetry readings and discussions about Adivasi issues in a number of cities and universities. 2020: Harvard University and Minnesota University of USA, poetry readings and discussions with students. 2020: Paris, France, poetry readings and discussions.

सम्प्रति —  वर्तमान में वे स्वतन्त्र पत्रकारिता के साथ कविता लेखन कर रहीं।
Presently Doing social work in villages and creating poems. E mail: jcntkerketta7@gmail.com

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